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Computer Virus define – कंप्यूटर वायरस से केसे बचे – 2 types of computer virus

कंप्यूटर वायरस से अपना सिस्टम कैसे बचाए –

कंप्यूटर वायरस  का नाम तो आपने बहुत सुना ही होगा, और ये भी सुना होगा कि किस तरह एक कंप्यूटर वायरस हमारे कंप्यूटर में खुश कर हमारे पूरे सिस्टम को खराब कर देता है।आज में आपको यहां यही बताऊंगा कि Computer Virus  क्या होता है, पहला कंप्यूटर वायरस कब बना, हम अपने कंप्यूटर से वायरस को केसे बचा सकते है, और कंप्यूटर वायरस कितने प्रकार के होते है।

Computer Virus - कंप्यूटर वायरस से केसे बचे

1. कंप्यूटर वायरस क्या होता है – What is computer Virus 

कंप्यूटर वायरस, Computer Programming के द्वारा बनाया गया एक ऐसी Coding होती है जो कंप्यूटर को या फाइल्स को हानि पहुंचाने के लिए बनाया जाता है। इनमे से कई वायरस ऐसे भी होते है, जो एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में इंफॉर्मेशन चुरा सकते है, जिसका पता भी नहीं चलेगा।

2. कंप्यूटर वायरस कैसे काम करता है – virus definition computer 

कंप्यूटर वायरस अपने ही तरीके से बड़ी सावधानी से काम करता है। ऐसे वायरस दिखने में जितने छोटे होते है उतना ही बड़ा – बड़ा काम कर सकते है। वायरस जब भी कंप्यूटर में जाता है, तो वो धीरे – धीरे अपना साइज बड़ा करता है वो अपने आपको कंप्यूटर के हर कोने तक पहुंचता है। 
जब वह पूरी तरह से कंप्यूटर में फेल जाता है। तब वह कंप्यूटर को स्लो करता है, जिससे कंप्यूटर हेंग करना चालू कर देता है। उस वक़्त वायरस धीरे धीरे कंप्यूटर में मौजूद डाटा को और फाइल्स को नस्ट करता रहता है। और यदि समय पर कंप्यूटर से वायरस नहीं हटाया गया तो वह वायरस कंप्यूटर को पूरी तरह से बंद कर देता है फिर उस कंप्यूटर को दुबारा चालू करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

3. कंप्यूटर वायरस कितने प्रकार का होता है – 

कंप्यूटर वायरस  दो तरह के होते कुछ कंप्यूटर वायरस अच्छे होते है तो कुछ वायरस बुरे होते है अच्छे वायरस में जैसा हमारा एंटीवायरस और बुरे वायरस में – 

Boot sector virus

ये ऐसा वायरस होता है, जो कंप्यूटर के मास्टर बूट रिकॉर्ड को खराब करता है। यानी जब कंप्यूटर ऑन होता है, तो ये वायरस उसमे बाधा उत्पन्न करता है। ऐसे  में आपके पास एक ही रास्ता रह जाता है कंप्यूटर को फॉर्मेट करने का।

Master Boot Record (MBR) – यह एक तरह का खास बूट सेक्टर होता है, जो हार्ड ड्राइव में फर्स्ट सेक्टर में फिक्स होता है। इसका काम कंप्यूटर को ये बताना होता है कि ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) को कैसे चलना है, या कैसे लोड करना है।

Direct action virus

 ये ऐसे वायरस होते है, जो आपको कंप्यूटर में चुपके से इंस्टॉल हो जाते है या डाउनलोड हो जाते है, और कंप्यूटर में Hide होकर अपना कार्य करते है। ऐसे वायरस कंप्यूटर में सिर्फ एक Specific File को ही हिट करते है या नुकसान पहुंचाते है। Example के लिए यदि ये वायरस केवल Excel फाइल को नुकसान पहुंचाने के लिए बना है, तो ये सिर्फ Excel फाइल को ही नुकसान पहुंचाएगा, हानि ये सिर्फ Specific फाइल को ही अपना टारगेट बनाएगा।

Resident virus 

ये वायरस भी चुपके से कंप्यूटर में स्टोर होकर छुप जाता है। इनका पता लगाना भी बहुत मुश्किल होता है ये वायरस भी एक Specific फाइल को हिट करते है।

Polymorphic virus 

ये एक ऐसा वायरस होता है, जो अपने आपको इस तरीके से हाइड कर लेता है, की इसे Antivirus भी नहीं ढूंढ पता। ये वायरस अपने आपको Modify करता रहता है, बदलता रहता है, ये अपने जैसे कई तरह के वायरस बना लेता है। इसी वजह से एंटीवायरस भी इसको नही पहचान सकता।

Overwrite virus

ये ऐसा वायरस होता है, जो कंप्यूटर में आ जाने के बाद फाइल्स के Content Delete कर देता है, और यदि हम इन फाइल्स को Open करते है, तो ये वायरस फाइल्स भी ओपन नहीं होने देता। ये वायरस वैसे तो बहुत कम ही होता है और ये ज्यादातर Emails के द्वारा कंप्यूटर में पहुंचता है।

Specefiller virus

ये ऐसा वायरस होता है जो कंप्यूटर में पहुंचने के बाद फाइल्स के Codes के बीच कभी – कभी खाली Space को भर कर फाइल्स को Demage होने से बचा लेता है। इसे Cavity virus भी कहते है।

Multipartite vieuse

कई वायरस एक ही फाइल या पार्टस पर अटैक करते है। वहीं ये वायरस एक बार में कई फाइल और कंप्यूटर के कई पार्टस पर अटैक करके हानि पहुंचाते है। ये वायरस Boot sector और Executable Files दोनों को ही Effect करता है।

4. कंप्यूटर वायरस का इतिहास – History of Computer virus

Computer Virus  की शुरुआत सन 1949 में Jhon von neumann ने एक ऐसा Self replicating programme बनाकर किया। ये दुनिया का सबसे पहले वायरस था लेकिन ये वायरस कंप्यूटर  में पहुंचकर सिर्फ अपने आप को बढ़ाता था। 
इसके बाद सन् 1970 में Bob thomas नाम के व्यक्ति ने इसी Self replicating virus के आधार पर एक नया वायरस बनाया जिसका नाम Creeper था। यह वायरस जब भी किसी के कंप्यूटर में जाता था, वहां एक मैसेज शो होता था। जो कि I am creeper catch me if you can  था। इस प्रोग्राम या वायरस को डिलीट करने के लिए Reaper Programm को बनाया गया था।
इसके बाद 1982 में 9th class के Richard skrenta  नाम के बच्चे ने Elk cloner  नाम का वायरस बनाया। जो अपने दोस्तो के साथ मजाक करने के लिए बनाया गया था। इस वायरस को उसने ऐपल 2 कंप्यूटर पर बनाया था। ये वायरस उसने गेम की Floppy disk के जरिए अपने दोस्तो तक पहुंचाया था। जब भी कोई इसे ज्यादातर यूज करता तो ये वायरस ओपन हो जाता और एक पोएम को डिस्प्ले करता था।
इसके बाद पाकिस्तान के Basit और Amjad नाम के दो भाई ने IBM PC के लिए Brain Virus बनाया। ये वायरस उन्होंने एक मेडिकल सॉफ्टवेयर कि Privacy रोकने के लिए बनाया था। जब भी कोई इस मेडिकल सॉफ्टवेयर को illegally यूज करता तो वहां एक warning massage और एक नंबर show होता था, लोग सॉल्यूशन के लिए उस नंबर पर कॉल करते, जिससे उन दोनों को पता चल जाता की इस सॉफ्टवेयर को कहां illegal यूज हो रहा है। उसके साथ साथ ये वायरस कंप्यूटर को slow भी कर देता था।
इसके बाद फिर कई धीरे – धीरे वायरस बनने लगे जो कंप्यूटर पर सीधे अटेक करते थे। और आज के टाइम में ऐसे बहुत से खतरनाक वायरस है जो बुरे इरादे से ही बनाए जाते है। इसीलिए आज के टाइम में जब भी कोई Computer Virus की बात करता है तो उसके मन में सिर्फ एक ही स्वभाव आता है कि वह वायरस गलत ही होगा, जबकि कुछ वायरस अच्छे भी होते है।

5. कंप्यूटर में वायरस कैसे फैलता है ?

कंप्यूटर में वायरस ज्यादातर हमारी ही लापरवाही की वजह से ही फैलता है। जिसके निम्न कारण है।

  • Emails – कई बार हमारी मेल पर कुछ अनजाने मेल आ जाते है, जिसमें किसी तरह का लिंक होता है और उस लिंक पर क्लिक करते ही वायरस हमारे सिस्टम में आ जाता है। इसीलिए किसी भी अनजाने लिंक पर क्लिक नहीं करे।                                                                             
  • Internet – आज के टाइम में हर कोई इंटरनेट चलता है और उसी इंटरनेट से हम कई बार वीडियो, ऑडियो, या मूवीज़ भी डाउनलोड करते है। ऐसे ही कई बार डाउनलोड करते वक़्त उन फाइल्स के साथ वायरस भी डाउनलोड हो जाता है।                                                                                                                   
  • Pandrive – पेन ड्राइव से भी कई बार हमारे कंप्यूटर में वायरस आ जाता है। यदि पेन ड्राइव वायरस वाला हुआ तो कई बार पेन ड्राइव में वायरस ना होने के बावजूद भी पेन ड्राइव में वायरस आ जाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्युकी जब भी एक पेन ड्राइव को ज्यादा बार अलग अलग कंप्यूटर में लगाया जाता है, और वो भी बिना वायरस स्कैन  किए  तो ऐसे में वायरस खुद ही पेन ड्राइव में बन जाता है, और फिर वह कंप्यूटर में फैल जाता है।

6. अपने कंप्यूटर को वायरस से कैसे बचाए ?

कंप्यूटर को वायरस से कई तरह से बचाया का सकता है –

  • सबसे पहले आप Antivirus का प्रयोग कर सकते है। एंटीवायरस सबसे पहला तरीका है, और सबसे अच्छा तरीका है कंप्यूटर या मोबाइल को प्रोटेक्ट करने का।                                                         
  • आप अपने कंप्यूटर या मोबाइल में Backup ले सकते है। बैकअप भी एक अच्छा तरीका है अपने सिस्टम को प्रोटेक्ट करने के लिए। यदि आपका सिस्टम खराब भी हो जाता है, तो आप बैकअप के जरिए अपनी सारी फाइल्स वापस ला सकते है।                                                                    
  • ईमेल प्रोटेक्शन भी कर सकते है। जब भी आपके पास कोई ईमेल आता है, तो कई बार वायरस भी साथ आ जाता है। इससे बचने के लिए आप Qiuckheel या इंटरनेट वायरस अपने कंप्यूटर में डाल सकते है, जिससे इंटरनेट से आने वाला वायरस आपके सिस्टम तक नहीं पहुंच सकता।                      
  • जब भी आप पेन ड्राइव अपने सिस्टम में लगाए तो उसे स्कैन जरूर करे ताकि पेन ड्राइव में होने वाला वायरस वहीं खत्म हो जाए।  और जब भी पेन ड्राइव निकले तो कंप्यूटर वाले फोल्डर में जा कर पेन ड्राइव वाले ऑप्शन पर Right click करके रिमूव पेन ड्राइव पर क्लिक करे और फिर पेन ड्राइव बाहर निकले।

Conclusion :- 
उम्मीद है आपको कंप्यूटर वायरस से जुड़ी हर जानकारी यहां मिल गई होगी। यहां आपने कंप्यूटर वायरस(Computer Virus define) क्या होता है, वायरस का इतिहास क्या था, कंप्यूटर में वायरस कैसे फैलता है, और वायरस से कंप्यूटर को कैसे बचा सकते है। यदि आपको कोई और भी जानकारी चाहिए इस टॉपिक से रिलेटेड या किसी अन्य टॉपिक से रिलेटेड तो आप तो आप मुझे नीचे Comment कर सकते है।

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