कोरोना वायरस की दवा कब बनेगी ?

coronavirus ki dawa kab banegi

कोरोना वायरस की दवा कब बनेगी ?

corona virus vaccine in hindi,covid 19 महामारी ने विश्व के लगभग हर देश में अपने पैर पसर दिए हैं अब सिर्फ एक उम्मीद की किरण है तो वो है इसकी वेक्सीन आज हर किसी की सोच में एक ही सवाल है की कोरोना वायरस की दवा कब बनेगी। हालाँकि दुनिया के देश इस पर काम कर रहे हैं परन्तु इसे बनाने मे एक वर्ष से काम नहीं लगेगा और अगर मान लिया जाए की इसका अविष्कार इसी वर्ष हो जाए तो इसका इतना अधिक उत्पादन संभव नहीं हो पायेगा।
कुछ कंपनियों ने एंटीबॉडी तो किसी ने आनुवांशिक कोड  को corona vaccine का  आधार बनाया है। कोरोना के ख़त्म करने  को लेकर पूरी दुनिया की लैब्स में  दिन-रात दवा और टीके पर काम  हो रहा है कोरोना वायरस के वैश्विक खतरा बनने के साथ ही दुनिया के कई दिग्गज दवा निर्माताओं और लैब वैज्ञानिकों  ने दवा और वैक्सीन की खोज शुरू कर दी है ।
इनमें कुछ पुराने एंटीवायरल की मदद ले रहे हैं तो कुछ कोरोना के साथ ही भविष्य में इस तरह की महामारी से बचाव के तरीके  खोज रहे हैं। ऐसी ही दवा और वैक्सीन की चरणबद्ध जानकारी, जो आने वाले खतरे को टालने में मददगार होंगी ।

  • गिलीड साइंस
दवा  :तीसरा चरण 
अमरीकी दवा कंपनी गिलीड की रेमडेसिविर दवा का पांच देशों में क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।चीन में एक हजार रोगियों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले इस दवा का परीक्षण इबोला के उपचार में किया गया था, लेकिन विफल रहा था।
  • एस्कलेटिस फार्मा
दवा: पथम चरण
चीनी कंपनी एस्कलेटिस द्वारा निर्मित दवा डैनोप्रेविर और रेटोनेविर को एचआइवी और हेपेटाइटिस-सी के उपचार में काम लिया जाता है। पिछले महीने कंपनी ने इनके मिश्रण का 11 रोगियों पर परीक्षण किया। इससे सभी 11 मरीज ठीक हो गए।
  • माडर्ना थेरेप्यूटिक्स
वैक्सीनः प्रथम चरण
अमरीकी कंपनी ने कोरोनावायरस के बाद वैक्सीन एमआरएनए- 1273 को महज 42 दिन में तैयार कर लिया। ये वैक्सीन शारीरिक कोशिकाओं को एंटीबॉडी तैयार करने में मदद करेगा। इसके बाद ठीक हुए रोगी के एंटीबॉडी से संक्रमित का इलाज होगा।
  • केंसीनो बिओलॉजिक्स 

वैक्सीनः प्रथम चरण
एबोला के लिए वेक्सीन बनाने वाली चीनी कम्पनी केंसीनो बिओलॉजिक्स कोरोना वायरस की वेक्सीन के परिक्षण के करीब है यह कोरोना वायरस के अनुवांशिक कोड कोड जरिये एंटीवायरल वेक्सीन बना रही है इसके परिक्षण को मंजूरी मिल गयी है।

  • आर्कच्यूरस थैरेप्यूटिक्स
वैक्सीन : प्री-क्लिनिकल  
अमरीकी कंपनी ने इयूक विश्वविद्यालय के साथ मिलकर आरएनए (जीन एडिटिंग से निकलने वाला प्रोटीन) से वायरस का खात्मा करने वाला टीका ईजाद किया है। इससे निकलने वाला प्रोटीन सक्रंमण के खतरे को दूर करेगा।
  • ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन
वैक्सीन : प्री-क्लिनिकल 
ब्रिटेन की कंपनी ग्लैक्सो ने चीनी बायोटेक फर्म को अपनी तकनीक उधार दी है। कंपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर संक्रमण से लड़ने वाला वैक्सीन बना रही है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बता कि इसका परीक्षण कब होगा?
  • क्योरवैक
वैक्सीन : प्री-क्लिनिकल 
मॉडर्ना की तरह क्योरवैक भी इंसान के न्यूक्लिक अनुक्रम का इस्तेमाल कर प्रोटीन बनाएगी। जिससे वैक्सीन बनाया जाएगा। कंपनी का दावा है कि अप्रेल में पशुओं पर परीक्षण होने के बाद इसे जल्द ही इंसानों पर भी
आजमाया जाएगा।
  • इनोवियो फार्मास्यूटिकल्स
वैक्सीन :प्री-क्लिनिकल 
चार दशक से डीएनए को दवा में बदलने का काम कर रही अमरीकी कंपनी का दावा है कि इस तकनीक से वह कोरोनावायरस के उपचार का टीका बनाएगी। इस माह परीक्षण संभव। हर वर्ष दस लाख वैक्सीन बनाएगी।
  • बायो एन टेक
वैक्सीन :प्री-क्लिनिकल 
जर्मन कंपनी बायोएन टेक ने भी आनुवांशिक कोड में बदलाव कर एंटीबॉडी के उत्पादन और वैक्सीन पर काम कर रही है। इसके ट्रायल को मंजूरी मिल गई है। शंधाई की फोसुन फार्मा जल्द ही चीन में ये टीके उपलब्ध करवाएगी।
  • एली लिली
वैक्सीन :प्री-क्लिनिकल 
अमरीकी कंपनी ने कनाडाई फर्म एराबेलरा के साथ संक्रमण के उपचार में इस्तेमाल किए जाने वाले 500 तरह के एंटीबॉडी की पहचान की है, जो वायरस से इंसान की रक्षा करेगा। कंपनी 4 माह के भीतर इंसानों पर इसका परीक्षण करेगी।
उम्मीद है की जल्द ही इन लोगों की मेहनत रंग लाएगी। कोरोना जैसी वैश्विक आपदा से निपटने का एकमात्र तरीका वेक्सीन ही है।इन सबके अलावा भी कुछ और लैब इस वायरस की दवा बनाने को लेकर काम कर रही हैं-
  • जॉनसन एंड जॉनसन अमेरिका
  • फाइजर -अमेरिका
  • रिजेनरेन फार्मा -अमेरिका
  • सैनोफी -फ़्रांस
  • टेकैडा -जापान
  • विर -अमेरिका
कोरोना वायरस की दवा कब बनेगी ,सभी देशों की वेक्सीन बनाने की होड़ मैं भारत भी पीछे नहीं है। हैदराबाद की भारत बायोटेक कंपनी इस पर काम कर रही है।यह कंपनी नाक के द्वारा ली जाने वाली वेक्सीन का निर्माण कर रही है। फलुजेन कंपनी  के वाईरोलॉजिस्ट ने भारत बायोटेक के साथ मिलकर इस पर काम शुरू कर दिया है। इस दवा का नाम कोरोफ्लु होगा। इस दवा को फलुजेन कंपनी की एम 2 एस आर दवा के आधार पर बनाया जायेगा। इसके परिक्षण मैं 3 से 6 महीने का वक़्त लगने वाला है।

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