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bakra eid kyu manai jaati hai | qurbani easy explain hindi

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qurbani ka maksad,हर साल मुसलमानाने आलम करोड़ों जानवरों की कुर्बानी करके जां निसारी के उस बेनज़ीर वाकिए की याद ता करते हैं जो आज से तकरीबन सवा पांच हज़ार साल पहले अरब की सरज़मीं में खुदा के घर के पास पेश आया। कैसा रिक्कत अंगेज (रूलाने वाला) और ईमान अफरोज मन्ज़र (ईमान से भरा) होगा वह मंजर जब एक बूढ़े और शफीक बाप अपने लख्तेजिगर से कहा, प्यारे बेटे! मैंने ख्वाब देखा है कि मैं तुझे जिब्हा कर रहा हूँ। बता तेरी क्या राय है? 

इस पोस्ट में हम जानेंगे की kurbani ka tarika क्या है और बकरा ईद क्यों मनाई जाती है।


 लायक फरजन्द ने बिला तअम्मुल (बिना संकोच) कहा-अब्बाजान! आपको जो हुक्म दिया जा रहा है उसे कर डालिए। आप इन्शा अल्लाह मुझे साबिरों में पाएंगे। और फिर इख्लास व वफा के उस पेकर ने अपनी मासूम गर्दन खुशी-खुशी जमीन पर इसलिए रख दी कि खुदा की रज़ा और तामीलए हुक्म के लिए उस पर छुरी फेर दी जाएऔर एक जईफ (बूढ़े) और रहमदिल बाप ने अपने लख्तेजिगर के सीने पर घुटना टेक कर उसकी मासूम गर्दन पर इसलिए तेज़ छुरी फेर देने का पक्का इरादा कर लिया कि उसके रब की मर्जी और हुक्म यही है।


इताअत व फरमाबरदारी का यह बेनज़ीर मंज़र देखकर रहमत ए खुदावंदी जोश में आई और यह निदा (आवाज) आई और हमने उन्हें निदा दी कि ऐ इब्राहिम ! तुमने अपना ख्वाब सच कर दिखाया। हम वफादार बंदों को ऐसी ही जज़ा (फल) देते हैं।
यकीनन एक यह खुली आजमाइश थी।उस वक्त एक और फरिश्ते ने इब्राहिम के सामने एक दुम्बा पेश किया वह इसके गले पर छुरी फेरकर जांनिसारी और वफादारी के जज्बात की तस्कीन करें और खुदा ने रहती दुनिया तक के लिए यह सुन्नत जारी कर दी कि दुनिया भर के मुसलमान हर साल उसी दिन जानवरों के गले पर छुरी फेर करइस बेनज़ीर कुर्बानी की याद ताज़ा करें।


 हमने इस बड़ी कुर्बानी फिदये (बदला) में देकर उस (नौ उम्र बच्चे को छुड़ा लिया) बड़ी कुर्बानी से मुराद कुर्बानी की यही सुन्नत है कि जिसका एहतमाम हर साल इसी दिन मुसलमान दुनिया के गोशे में करते हैं और लाखों मुसलमान मक्कह की उस सरज़मी पर इस सुन्नत को ताजा करते हैं जहां यह वाकिया पेश आया था।


इस्लाम के मानी हैं कामिल इताअत मुकम्मल सिपुर्दगी और सच्ची वफादारी। कुर्बानी का यह बेनजीर अमल वह पेश कर सकता है जो वाके आत अपनी पूरी शख्सियत और पूरी जिन्दगी में खुदा का मुकम्मल इताअत गुजार हो जो जिन्दगी के हर मामले में उसका वफादार हो और जिसने अपना सब कुछ खुदा के हवाले कर दिया हो। अगर आपकी ज़िन्दगी गवाही नहीं दे रही है कि आप खुदा के मुस्लिम और वफादार हैं और अपनी पूरी ज़िन्दगी खुदा के हवाले नहीं की है तो आप सिर्फ कुछ जानवरों का खून बहाकर इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत को ताज़ा नहीं कर सकते। और उस अहद (वचन) में पूरे नहीं उतर सकते जिस वक्त आप अपने खुदा से करते हैं।

दुनिया के मुसलमान उस दिन जानवरों का खून बहाकर खुदा से अहद करते हैं कि ऐ रब्बुल आलमीन हम तेरेमुस्लिम हैं, तेरी कामिल इताअत ही हमारा शेवा है। हम तुझसे वफादारी का ऐलान करते हैं और हज़रतइस्माईल की तरह तेरे हुजूर अपनी गर्दन पेश करते हैं। कुर्बानी की यह सुन्नत जारी करके हज़रत इस्माईलअलैहिस्सलाम की याद ताज़ा करते हैं मगर हमारा सब कुछ तेरा ही है। तेरा इशारा होगा तो हम तेरे दीन के खातिर अपनी गर्दन कटाने और अपना खून बहाने से हरगिज़ दरेग न करेंगे। हम तेरे हैं और हमारा सब कुछ तेरा है। हम तेरे वफादार हैं और जां निसार बन्दे हज़रत इब्राहिम और हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम के पैरोकार हैं और उन्हीं की अक़ीदत से सरशार हैं 

कुर्बानी की दुआ पढ़ते हैं । वह दरअसल वफादारी और जां निसारी के इन्हीं जज़्बात का इज़हारहै।दरअसल उसी वाकिए को ताज़ा करना और उन्हीं जज़्बात को दिल व दिमाग पर तारी करना कुर्बानी की रूह और उसका असल मकसद है। अगर यह जज़्बात और इरादा न हों, खुदा की राह में कुर्बान होने की आरजू और ख्वाहिश न हो खुदा की कामिल इताअत और सब कुछ उसके हवाले कर देने का अज्म और नहो, तो महज़ जानवर का खून बहाना गोश्त खाना और तक्सीम करना कुर्बानी नहीं है। बल्कि गोश्त तक्सीम करना एक तकरीब (उत्सव) है जो आप हर साल मना लेते हैं और खुश होते हैं कि हमने इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत को ताज़ा कर दिया। खुदा को न जानवरों के खून की ज़रूरत है न गोश्त की, उसका तो इख्लास, वफा और तकवा व जां निसारी के वह जज़्बात मतलूब हैं जो आपके दिल में पैदा होते हैं। 

खुदा का इरशाद है ‘अल्लाह को न जानवरों का गोश्त पहुंचता है और न उनका खून । उसको तो सिर्फ तुम्हारा तकवा पहुंचता है’ यह तक़वा और इताअत व फरमाबरदारी का जौहर कुर्बानी की रूह है और खुदा के यहां सिर्फ वही कुर्बानी कुबूल होती है जो मुत्तकी (अल्लाह से डरने वाले तकवे वाले) लोग इताअत व फरमाबरदारी व जां निसारी के जज्बात के साथ पेश करते हैं।

कुर्बानी की दुआ

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आपको आर्टिकल “qurbani ka maksad | bakra eid kyu manai jaati hai” अच्छा लगे यही दुआ है । कमेंट करना न भूले ।

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