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SHAB E BARAT 2021

Mid-Sha’ban 2022 will begin in the evening of
Friday
18 March

and ends in the evening of

Saturday
19 March

muslim festival shab e barat,अभी भी भारत के साथ और भी कई देश कोरोना से परेशान हैं वही lockdown की स्थिति अभी भी बानी हुई है। इसी बिच इस्लामिक festival शब ए बारात आ रहा है जो 18-19 अप्रैल को मनाया जायेगा। शब ए बारात हर वर्ष हिजरी संवत के  महीने शाबान में मनाया जाता है।शब ए बारात के पहले वाली रात को लैलत अल बारात की रात कहते है इस रात को मुस्लिम लोग पूरी रात खुदा की इबादत करते हैं। दरअसल इन दो दिनों को तौबा के दिन माना जाता है। पूरी रात इबादत करने के बाद कुछ लोग दूसरे दिन को रोजा भी रखते हैं।यह दुनिया के लगभग हर इस्लामिक देश में मनाया जाता है। इसे चार परम या मुक़द्दस रातों में से ही एक माना जाता हैं जिनका इस्लाम में जिक्र है। वो चार मुक़द्दस रातें  हैं-

  1. आसुरा की रात
  2. शब ए मैराज
  3. शब ए बारात
  4. शब ए कद्र

ये चरों रातें इस्लाम में अपना अलग महत्व रखती है इन सभी रातों को इबादत और तौबा की जाती है.

what is shab e barat in quran :-

वैसे तो शब इ बारात को कुरान में कोई खुलकर जिक्र नहीं है। परन्तु कुछ इस्लामिक विद्वानों ने इसे क़ुरान के आधार पर समझने की कोशिश की है। इसके अलावा कई हदीसों में भी इसके बारे में बताया गया है। अगर हम शब ए बारात को सिया मुसलामानों के नजरिये से देखें तो माना जाता है की इस दिन उनके इमाम अल मेहदी का जन्म हुआ था और वो लोग इसे जन्म के दिन के रूप में मानते हैं जो की इत्तेफाक है की उनका जन्म इसी दिन हुआ था।कुछ लोगों का मानना है की इस रात हमारे मरे हुए बुजुर्गों के लिए दुआ करनी चाहिए ताकि अल्लाह उनकी मगफिरत कर दे और उन्हें दोजख के अजाब से रिहा कर दे। इस रात लोग कब्रिस्तान में भी जाकर दुआ करे हैं।

Why is Shab e Barat importance?

इस्लाम में माना जाता है की शब ए बारात की रात को उनका हिसाब होता है या जो उन्होंने साल भर गुनाह या अच्छे काम किये है उनका हिसाब होता है।इसलिए वो पूरी रात इबादत करके और तौबा करके गुजारते हैं। इसके अलावा दूसरे दिन का रोजा भी रखते हैं।इस इबादत में क़ुरान की तिलावत करना ,नफ़्ल पढना,मिलाद पढ़ना आदि शामिल होता है।इसे हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है घरों में मिठाइयां और पकवान बनाये जाते हैं,मस्जिदों में सजावटें भी की जाती हैं।अपने बुजुर्गों की कब्रों पर चिराग जलाये जाते हैं और उनकी मगफिरत की दुआ की जाती है 

Is shab e barat fast compulsary?

कुछ लोगों के जहन में एक सवाल होता है की क्या शब् ए बारात का रोजा रखना अनिवार्य होता है। परन्तु इस्लामिक विद्वानों और हदीसों में बयां किया है की इस दिन रोजा रखना अपनी इच्छा से होता है बल्कि इसकी कोई अनिवार्यता नहीं है। लेकिन लोग अपनी इच्छा से ये रोजा रखते हैं। इस्लाम में माना जाता है की हर हिजरी महीने की 13-14-15 तारीख को को रोजा रखना चहिये और इत्तेफाक से शब ए बारात भी शाबान महीने की 15 तारीख को मनाया जाता है।
What do we pray on Shab e Barat?
 
शब इ बारात की रात को पूरी दुनिया में मुस्लिम लोग अल्लाह से अपनी गुनाहों की तौबा करते हैं। इस रात के दौरान वे मिलाद इ शरीफ करते हैं। इसके अलावा रात भर नफ़्ल पड़ते हैं और कुछ लोग सलात उल तस्बीह भी पड़ते हैं जिसके बारे में अल्लाह ने फ़रमाया है की इसे आदमी को कम से कम अपनी उम्र में एक बार तो पड़ना चाहिए।सभी अपनी गुनाहों के लिए रोकर तौबा करते हैं 
हर वर्ष की तरह यह त्यौहार lockdown के चलते उतने हर्षोउल्लास से तो नहीं मनाया जा सकता है परन्तु घर में रहकर इबादत की जा सकती और पकवान बनाये जा सकते हैं।उम्मीद हैं की आप सब इसे हर्ष के साथ मनाएंगे। 
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