नमाज़ (namaz) के लिए कुछ शर्ते हैं, जिनको पूरा किए बगैर नमाज़ नहीं हो सकती। कुछ शर्तों का नमाज़ शुरू से पहले पूरा करना ज़रूरी है, जैसे वुजू और करने शर्तों का नमाज़ पढ़ते हुए खयाल रखा जाता है। नमाज़ पढ़ने से पहले इन सात शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है-

  1. . बदन पाक हो
  2. कपड़े पाक हों
  3. नमाज़ अदा करने की  जगह(namaz ada karne ki jagah) पाक हो
  4. . कपड़े पहन रखे हों यानी सतर छिपा रखा हो
  5.  नमाज़ का वक्त हो
  6. किब्ले की तरफ़ मुँह करना 
  7. नीयत करना यानी यह इरादा करना और ध्यान जमाना कि मैं फ़लां नमाज़ पढ़ रहा हूँ।
  •  (क) बदन पाक करने के लिए, अगर नहाने की जरूरत हो तो नहा लीजिए या बदन पर गन्दगी लगी हो। तो धो लीजिए। गुस्ल (नहाने) की तर्कीब यह है- पहले पाक-साफ पानी लीजिए, फिर दोनों धोइए, इस्तिजा कीजिए बदन पर गन्दगी अगर लगी हो तो धो डालिए, फिर वुजू कीजिए। अगर रोज़ा न हो तो कुल्ली के साथ गरारा भी कीजिए, फिर सारे बदन पर तीन बार पानी डालिए। याद रखिए गुस्ल में कुल्ली करना और बदन पर पानी डालना फर्ज़ है, इनके बरौर ग़ुस्ल नहीं हो सकता।

(ख) बदन पाक करने के लिए अगर नहाने की जरूरत न हो तो सिर्फ वुजू कर लीजिए। वुज़ू की तर्कीब यह सबसे पहले दोनों हाथ तीन बार धोइए हरी टहनी की मिस्वाक से दाँत साफ कीजिए। अगर मिस्वाक न हो तो से वरना दाहिने हाथ की बड़ी उंगली से दाँत ब्रुश मलिए, फिर तीन बार नाक में पानी डालकर बाएं हाथ से नाक साफ कीजिए। फिर पूरे चेहरे पर तीन बार पानी डालिए। इसका खयाल रखिए कि पेशानी के बालों से ठोडी के नीचे तक और कानों की कंपटियों तक कोई जरा सा बाल बगाबर भी हिस्सा सूखा न रहे, वरना वूजू न होगा, फिर दोनों हाथ कुहनी समेत तीन तीन बार धोइए। अब नया पानी लेकर सर, कानों सर  गरदन का मसह कीजिए। आखिर में दोनों पाँव धोइए। पहले दाहिना, फिर बायाँ पाँव धोएं।
वूजू करते वक्रत बातें नहीं करनी चाहिए।

  •  नमाज पढ़ने के लिए कपड़ो का पाक होना भी फर्ज है और अच्छा यह है कि कपड़े साफ ही, मैले न हो, बदबू न आती हो। आप हमेशा खयाल रखिए कि आपके साथ फूरिश्ते भी रहते हैं। बदन की बदबू से, जैसे आपके साथी इंसानों को तकलीफ़ होती है, उसी तरह फरिश्तों को भी तकलीफ़ होती है।
  • नमाज पढ़ने की जगह पाक होनी चाहिए। जमीन पर कोई पाक कपड़ा बिछा लीजिए। गंदगी के पास या गंदी जमीन पर नमाज नहीं पढ़नी चाहिए। सूखी जमीन पाक मानी जाती है। लॉन पर भी आप नमाज़ पढ़ सकते हैं।
  •  नमाज़ के लिए मुनासिब कपड़े पहनना भी ज़रूरी है। मर्द के लिए नाफ़ से नीचे घुटने तक बदन का ढाँकना फर्ज़ है और औरत के लिए हाथ-पाँव और मुँह के अलावा सारा बदन ढाँकना फर्ज़ है। जिस हिस्से का छिपाना फर्ज़ है, उसी को सतर कहते हैं।
  • नमाज़ का वक़्त भी नमाज़ पढ़ने के लिए ज़रूरी है, यानी जिस नमाज़ के लिए जो वक़्त रखा गया है, उसी वक़्त वह नमाज़ पढ़नी चाहिए, वक़्त से पहले पढ़ने से नमाज़ नहीं होगी और दोबारा पढ़नी पड़ेगी। वक़्त के बाद नमाज़ क़ज़ा हो जाती है, जिसका सवाब वक्त पर पढ़ी गयी नमाज़ के बराबर नहीं होता और वक़्त पर न पढ़ने का गुनाह भी होता है।
  • नमाज़ पढ़ते वक़्त क़िब्ले की तरफ़ मुँह करना भी लाज़िम है, भारत, पाकिस्तान में किब्ला पश्चिम की तरफ है। मुसलमानों का क़िब्ला ख़ाना-काबा शहर मक्का में है और मक्का मुकर्रम अरब में है।