salatul tasbeeh ka tarika,हेलो इस्लामिक दोस्तों इस पोस्ट में हम जानेंगे की सालतुल तस्बीह क्या है और इसकी नमाज़ कैसे अदा की जाती है। salatul tasbeeh की नमाज हर किसी को जिंदगी में काम से काम एक बार तो जरूर पढ़नी चाहिए। तो इस पोस्ट को पुरे इत्मीनान के साथ पढ़े और आगे भी शेयर करें ताकि कोई इससे दूर न रहे।
सलातुल तस्बीह की नमाज़ में “सुब्हा-नल्-लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि वला इला-ह इललल्लाहु वल्लाहु अकबर” को कई बार पढ़ा जाता है और इसी को सलातुल तस्बीह कहते हैं।
salatul tasbeeh kya hai ?

सुब्हा-नल्-लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि वला इला-ह इललल्लाहु वल्लाहु अकबर

سُبْحَانَ اللّٰہِ، وَالْحَمْدُ لِلّٰہِ، وَلَا إِلٰہَ إِلاَّ اللّٰہُ، وَاللّٰہُ أَکْبَرُ

इस तस्बीह को 300 मर्तबा पढ़ा जाता है। इसमें 4 रकात पढ़ी जाती हैं जिनसे हर rakat में 75 मर्तबा तस्बीह  “सुब्हा-नल्-लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि वला इला-ह इललल्लाहु वल्लाहु अकबर” पढ़ी जाती है ऐसे करके हर रकात में 75 के हिसाब से 300 मर्तबा तस्बीह हो जाती है। अब हम निचे विस्तार से इसे पढने का तरीका देखते हैं :-

नियत करें :-

सबसे पहले नियत करेंगे :- नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ सलातुल तस्बीह वास्ते अल्लाह तआला के रुख मेरा काबा सरीफ की तरफ अगर आप इमाम के पीछे है तो यह भी पढ़े – पीछे पेस इमाम के 
salatul tasbeeh ki kitni rakat hoti hain ?
सलातुत्-तस्वीह की चार रकअत इस तरह अदा करें कि सुब्हा-न- कल्लाहुम्-म के बाद पन्द्रहबार सुब्हा-नल्-
लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि वला इला-ह इललल्लाहु वल्लाहु अकबर पढ़ें। फिर अअूज़ु बिल्लाहि और बिस्मिल्लाह और सूर: फ़ातहः के बाद और कोई सूर: पढ़ कर दस बार यही तस्बीह पढें
फिर रकूअ में सुब्हा-न रब्बियल अऱीम के बाद दस बार फिर रूकूअ से सर उठा कर दस बार फिर पहले सजदे में
सुब्हा-न रब्बियल आला के बाद दस बार फिर सजदे से सर उठाकर दस बार फिर दूसरे सजदे में दस बार यानी एक रकअत में पिछत्तर बार तस्बीह हुई । इसी तरह चार रकअत अदा करें । चार रकअत में जुमला तस्बीह तीन सौ मर्तबा हुई । बाद फ़राग़ नमाज़ इसतग़फ़ार, दरूदशरीफ़ एक-एक सौ बार पढ़ कर सजदे में सर रख कर ख़ुदाये तआला से नेक तौफ़ीक़ की दुआ करे । इस रात में तीन मर्तबा सूरः यासीन शरीफ़ की तिलावत करना चाहिये । पहली मर्तबा दराज़ीये उम्र की नियत से, दूसरी मर्तबा कुशादगी रिज़्क़ की नियत से तीसरी मर्तबा दाफ़अ अमराज़ व बलायात की नियत से जब तीन मर्तबा सूरः यासीन पढ़ चुके तो ये पढ़े :

बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम० अल्लाहुम्-म याज़ल्मन्नि व-ला यु-मन्रु अलैहि या जल्-जलालि वल्-इकरामि या ज़त्-तव्लि वल्-इन्आम० ला इला-ह इल्ला अन्-त ज़हरुल्-लाजी-न व-जारुल्-मुस्तजीरी-न व-अमानुल्खा इफ़ीन ० अल्लाहुम्-म इन्कुन्-त कतब्तनी इन्-द-क फ़ी उम्मिल्-किताबि शक्रिय्यन
अव्महरूमन अव्मत्रूदन अव्मुक्तिरन अलैय्-य फ़िर्-रिज़्कि फम्हु । अल्लाहुम्-म बिफ़ज़्लि-क शकावती व हिरमानी वतरदी वक़त-ता-र रिज़्की व-सब्बित्नी इन्-द-क सईदम्-मरज़ूकम्- मुवफ़िफ़क़ल्-लिलखैराति फ़इन्-न-क कुल्-त व कवलु- कल्-हक़्कु फ़ी किताबि-कल् मुनज़्ज़लु अला लिसानि नविय्यि-कल् मुरसलि यम्हुल्लाहु मा यशाउ व युस्बितु व इन्-दहु उम्मुलकिताबि इलाही बित्-तजल्लियिल् अअज़मि फ़ी लैलतिन्-निस्फ्रि मिन् श्रवा-नलूमुकर्- रमिल्लती युफ़-रकु फ़ीहा कुछ अम्िन हकीमिन व युब्मु अन् तक्शि-फ़ अन-ना कुल्ल मिनल् बलाईमा तअलमु व मा ला नअलमु वमा अन्-त बिही अअुलमु इन्-न-क अन्-तल् अअज्जुल् अक-रमु व-सललल्लाहु अला साय्यिदिनां मुहम्मदिवं वअला आलिही व अस्हाबिही ।

सालतुल तस्बीह को वैसे तो हम कभी भी पढ़ सकते हैं। मगर ज्यादातर खास रातों जैसे सबे बारात की रात ,सब मैराज को पढ़ा जाता है क्योंकि हर किसी सालतुल तस्बीह नहीं पढ़नी आती मगर इन रातों को मस्जिदों में मूलवी पढ़ा देते हैं। और यह सही भी है।

मुझे उम्मीद है की मेरी पोस्ट “Salatul tasbeeh namaz kaise padhen | salatul tasbeeh ka tarika,”आपको बहुत कामगार रही होगी। कमेंट करके मुझे बताये की पोस्ट कैसी लगी।मेरे लिए भी दुआ करना। अल्लाह आपकी हर दुआ कबूल करे।