kya corona virus hawa me bhi fail saktaa h

क्या कोरोना वायरस हवा मैं भी फ़ैल सकता है ?

Can corona virus spread to air too,CORONA जैसी चुनौती से आज दुनिया का हर देश अपने-अपने स्तर पर सामना कर रहा है। इसी बिच लोगों के दिमाग में एक सवाल है की क्या कोरोना वायरस हवा मैं भी फ़ैल सकता है ?

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स्वास्थ्य मंत्रालय की भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद (आइसीएमआर) का कहना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण हवा से फैलने का फिलहाल कोई सबूत नहीं।कोरोना  वायरस को लेकर होने वाली नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना वायरस के हवा से फैलने को लेकर  पूछे गए एक सवाल के जवाब में आइसीएमआर के वैज्ञानिक व महामारी विज्ञान और संचारी रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रमन आर गंगाखेडकर का कहना है की  दुनिया भर में लाखों मामले (कोरोना  वायरस) के मिल चुके हैं। यदि वैज्ञानिक सबूतों के आधार बात करें तो ऐसा सबूत नहीं मिला है जो साबित करे की यह वायरस हवा मैं फैलता है । डॉ. गंगाखेडकर ने  भी कहा कि यदि कोरोना  ड्रॉपलेट से फैलने के बजाय हवा से फैलता तो परिवार के प्रत्येक व्यक्ति संक्रमित होता, अस्पताल में अन्य रोगियों के लिए भी यही बात लागू होती।स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि देश के कई  जिलों में कोरोना संक्रमण के मामले मिले हैं।
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17 मार्च को अमेरीका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ ने भी एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमे कहा गया था की यह वायरस हवा में 3-4 घंटे तक जीवित रह सकते है।
27 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर पोस्ट एक वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार भी फिलहाल इस बात के कोई सबूत नहीं है जिनके आधार पर यह कहा जा सके कि कोरोना का वायरस सार्स-सीओवी-2 हवा से फैलता है।यदि कुछ संक्रमितों को वेंटिलेटर पर लेने के लिए उनकी मुंह के रास्ते फेफड़ों तक हवा की नली डालने (इंट्यूबेटिंग) के दौरान संक्रमण फैलने के कुछ मामलों के चिकित्सीय संदर्भों को छोड़ दें तो।वहीं वैज्ञानिकों का एक वर्ग इससे सहमत नहीं आस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन क्वींसलैंड विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक इन्हीं में से एक हैं। उनका कहना है कि ‘इस पर काम करने वाले वैज्ञानिकों के मन में कोई संदेह नहीं कि वायरस हवा में फैलता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन की कई कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर चर्चा हुई है लेकिन उन्होंने अभी तक ऐसी किसी भी बात को सामने नहीं रखा जिससे साबित हो की कोरोना हवा मैं फैलता है। परन्तु विश्व स्वास्थ्य संगठन की सम्भवनाएँ बानी हुई हैं उनका कहना है की कुछ हद तक यह हवा में रह सकता है लेकिन इसका इसका खतरा सिर्फ कोरोना संक्रमित का इलाज करने वाले डॉक्टर्स या उसके आस पास रहने वाले लोगों को हो सकता है।

वैज्ञानिक मतभेद :-

वैज्ञानिक भाषा में 5 माइक्रोमीटर से छोटे कणों को ‘एयरोसोल्स’ कहा जाता हैं। एयरोसोल्स का मतलब होता है ठोस या तरल से बेहद छोटे कणों के बादल। कोरोना के फैलने पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों एक तबके का कहना है कि एयरोसोल्स हवा में तैरते रहते हैं और कोरोना संक्रमित के खांसने या छींकने के दौरान निकलने वाले तरल कण एयरोसोल्स के आकार के भी हो सकते हैं। इसी आधार पर वे दावा करते हैं कि कोरोना हवा से फैलता
है। वैज्ञानिकों के दूसरे वर्ग का कहना है कि मुंह-नाक से निकलने वाली छींट या ड्रॉफ्लेट, एयरोसोल से भारी होते हैं वह कुछ दूरी के बाद गिर नीचे गिर जाते हैं।
गुटखा खाना भी हो सकता है नुकसानदायक :-
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सार्वजनिक स्थानों में गुटखा, पान मसाला, पान,सुपारी आदि न खाने की सलाह दी
है। सलाह अनुसार इन्हें खाने के बाद मुंह में अधिक थूक बनने के कारण ज्यादा थूकना पड़ता है। ऐसे सार्वजनिक स्थानों में थूकने से संक्रमण फैलने की गति तेजी हो जाएगी

अफवाहें :-

भारत में जितनी तेजी से महामारी फैलती है उससे कहीं ज्यादा तेजी से अफवाहें फैलती हैं। कोरोना के हवा में फैलने के को लेकर अफवाह सोशल मीडिया पर तेजी से फ़ैल रही है की कोरोना वायरस हवा मैं 8-10 घंटे रहता है और किसी ठोस सतह पर 3-4 घंटे रहता है परन्तु स्वास्थ्य मंत्रालय या विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अभी तक ऐसी कोई भी पुस्टि नहीं की है।

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