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Share market in Hindi शेयर मार्केट क्या है? Shares meaning in Hindi

Stock Market कैसे काम करती है, भारत की स्टॉक मार्किट 

स्टॉक मार्किट के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा इसे Share market के नाम से भी जानते है। Share market आज इतनी गिरावट हुई है, Share market की वजह से कंपनी बर्बाद हो गयी है, ऐसी बाते बहुत सुनी होगी।  आज में आपको यहाँ पर बताऊंगा की share बाजार क्या है ? वो भी हिंदी में भारत में शेयर मार्किट कहाँ है? शेयर क्या होता है? शेयर के भाव घटते बढ़ते क्यों है। 

Stock Market / Share Market क्या है?

जैसे की नाम से ही पता चलता है – Share Market यहाँ Share का hindi meaning होता है हिस्सा और मार्किट मतलब बाजार। यानि ऐसा बाजार जहाँ कम्पनी का हिस्सा बिकता हो। लेकिन ये stock exchange (NSE,BSE)बाजार इंडिया में कुछ शहरों में ही है। स्टॉक मार्किट के अंदर उस कंट्री की सभी लिस्टेड कंपनी का डाटा होता है, और सभी कंपनी स्टॉक मार्किट के अंदर रेजिस्टर्ड होती है।

Stock Market in India / भारत में शेयर बाजार 

भारतीय प्रतिभूति बोर्ड (SEBI) की वेबसाइट पर दी गई लिस्ट के अनुसार भारत में 7 स्टॉक एक्सचेंज है,

इसमें से 2 प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है 

  • BSE Ltd. — बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज मुंबई – जिसका प्रमुख सूचकांक है – SENSEX 
  • NSE Ltd. – नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मुंबई – जिसका प्रमुख सूचकांक है – NIFTY(50)

इसके आलावा 5 स्टॉक एक्सचेंज है 

  • India International Exchange (India INX) मुम्बई, यहाँ BSE का सहायक एक्सचेंज है। 
  • Calcutta Stock Exchange Ltd.- (CSE India) जिसका मुख्यालय कलकत्ता बंगाल में है। 
  • Magadh Stock Exchange Ltd. –  (MSE India) जिसका मुख्यालय पटना में है। 
  • NSE IFSC Ltd.- मुंबई – NSE का सहायक एक्सचेंज है। 
  • Metropolitan Stock Exchange of India Ltd.- बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स –मुंबई। 
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Types ऑफ़ Share / Share कितने प्रकार के होते है 

Share तीन Types के होते है :-

  • Equity Share / इक्विटी शेयर 
  • Preference Share / प्रेफरेंस शेयर 
  • DVR Share / डीवीआर शेयर

Equity Share / इक्विटी शेयर 

इक्विटी शेयर  वह होता है जिसमें लाभांश तय नहीं होता है और जिसमें निवेशक यानी शेयर होल्डरों को मालिक माना जाता  है।  इन्हे इक्विटी शेयर की जगह शेयर भी कहते है।  क्यूंकि शेयर मार्किट के अंदर सबसे ज्यादा बिक्री इक्विटी शेयर की होती है। और इसमें पर शेयर का  रेट  %  के हिसाब से प्रॉफिट और लोस्स निर्धारित किया जाता है। 

Preference Share / प्रेफरेंस शेयर

प्रेफरेंस शेयर कंपनी का वह शेयर होता है जिसमें कंपनी डूब जाए या घाटे में जाए या कंपनी बड़े मुनाफा कमा लें, इन सभी स्थिति में निवेशकों को तय की गई लाभांश एवं मूलधन वापस मिल जाता है। यानि शेयर खरीदते समय ही ये तय हो जाता है की जितनी राशि पर शेयर के हिसाब से बताई गयी है  उतनी राशि आपको मिल जाएगी।  फिर चाहे कंपनी को loss ही क्यों न हो जाये। 

DVR Share / डीवीआर शेयर

DVR की फुल फॉर्म – Differential Voting Rights होती है जो व्यक्ति DVR शेयर खरीदता है वो कंपनी में वोटिंग करने का हक़ आधे  तरीके से होता है। यानि जैसे आपने 1 DVR शेयर ख़रीदा तो आपको कंपनी में 1 ही वोट करने का अधिकार है, और ऐसा भी हो सकता है की आपको 1 वोट करने  के लिए 10 शेयर खरीदने होंगे। 

Share कैसे खरीदते है ?

यदि कोई कंपनी NSE या BSE में 5 लाख रूपए के शेयर बिकने के लिए जारी किये, अब इस समय कोई कंपनी या व्यक्ति उस कामान्य के जितने शेयर खरीदेगी उतने प्रतिशत कंपनी या व्यक्ति का उस कंपनी पर मालिकाना हक़ हो जायेगा, जिस कंपनी ने शेयर जारी किये है। 
जब कोई कंपनी शेयर जारी करती है तो उस समय Public के लिए कितना शेयर जारी करना है, ये उस कंपनी के ऊपर निर्भर करता है। इस समय यदि आपको कोई शेयर खरीदने या बिकने है तो इसके लिए आपको शेयर मार्किट के ब्रोकर से मदत लेनी होती है। उनको शेयर मार्किट की अच्छी जानकारी होने के कारन वह आपकी मदत कर सकते है की आपको किस कंपनी के कितने शेयर खरीदने चाहिए और किन शेयर को खरीदने से Profit और Loss हो सकता है।  
यहाँ किस कंपनी के शेयर का मूल्य कितना होगा ये BSE / NSE  में दर्ज होती है। और ऐसा भी नहीं की कंपनी के शायरों का मूल्य एक जैसा रिश्ता है, कंपनी का शायरों का मूल्य घटता बढ़ता रहता है। यहाँ सभी शेयर बाजार का नियंत्रण भारतीय प्रतिभूति एंव विनिमय बोर्ड (SEBI) के हाथ में होता है। 

Share के भाव घटते – बढ़ते क्यों है ?

शेयर बाजार को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी यानी SEBI) के नियमों के अनुसार चलना पड़ता है, शेयर बाजार में शेयर की मांग, बिक्री के लिए उपलब्ध शेयर, कंपनी के कामकाज, भविष्य के अनुमान और कंपनी के वित्तीय नतीजे की वजह से उसके भाव में बदलाव होता है। यानि किसी कंपनी के Loss और Profit,  किसी कंपनी के कामकाज, Order मिलने या छिन जाने जैसे जानकारी के आधार पर कंपनी के शायरों का भाव घटता – बढ़ता है। 

Share जारी करने के लिए कंपनी को अनुमति लेनी होती है या नहीं ?

किसी कंपनी को शेयर जारी करने के लिए अनुमति लेनी होती है और वह SEBI से अनुमति लेता है। सेबी की अनुमति के बाद ही कोई कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होकर अपने शेयर जारी करती है किसी कंपनी का प्रॉफिट तीन महीने या छ महीने या फिर साल के आधार पर पता चलता है। 

कोई व्यक्ति शेयर बाजार में निवेश कैसे शुरू करे ?

निवेश शुरू करने के लिए किसी व्यक्ति को ब्रोकर की मदत लेनी होती है और फिर अपना डीमेट अकाउंट खुलवाना होता है, इसके बाद आपको डीमेट अकाउंट को अपने बैंक अकाउंट से लिंक करना होगा बैंक अकाउंट से आप अपने डीमेट अकाउंट में फंड ट्रांसफर करे और फिर ब्रोकर को आर्डर देकर शेयर ख़रीदे। इसके बाद फंड डीमेट अकाउंट में ट्रांसफर हो जायेंगे।  फ़ीफ़ आप जब चाहे उसे किसी ब्रोकर के माध्यम से बेच सकते है।

कंपनी अपने शेयर क्यों बेचती है ?

कम्पनियाँ अपना निवेश बढ़ने के लिए shares बेचती है क्योंकी बिना निवेश के किसी एक व्यक्ति के लिए बड़ी-बड़ी कंपनी को चलाना या छोटी कंपनी को बड़ा बनाना आसान नहीं है। इन सब में बहुत पैसा खर्च होता है और इतनी बड़ी रकम हर किसी के पास नहीं होती जिनके पास होती है वह लोग अपनी कंपनी चला लेते है परन्तु 80% लोगों के पास इतना पैसा नहीं होता। 

उम्मीद है शेयर मार्किट के बारे में हिंदी में ()आज आपने बहुत कुछ जान लिया होगा। शेयर मार्किट के बारे एक बार में बताना काफी मुश्किल है, क्योकि शेयर मार्किट एक ऐसा subject है या Topic है जितना जानो उतना कम है।

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